‘यही हकीकत है मेरी, मैं उम्मीद-ए-जहाँ का पुलिंदा था,
मैं तब तक मरता रहा, जब तक कि मैं ज़िंदा था..’
– प्रयाग
मायने :
उम्मीद ए जहाँ – दुनियाँ की उम्मीद
पुलिंदा – ढेर
‘यही हकीकत है मेरी, मैं उम्मीद-ए-जहाँ का पुलिंदा था,
मैं तब तक मरता रहा, जब तक कि मैं ज़िंदा था..’
– प्रयाग
मायने :
उम्मीद ए जहाँ – दुनियाँ की उम्मीद
पुलिंदा – ढेर