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उसने एक आस लगाई थी

हाँ उसने एक आस लगाई थी।
सोचा था एक दिन मिल जायेगा वो ख़्वाब जो बचपन से देखा हैं।
पर बदल गया ये संसार जैसे कोई बुरा सपना हो।
लेकिन अपना कर उस बुरे सपने को उसने एक आस लगाई थी।
पर इस जमाने को उसकी ये आस भी रास ना आई।
हाँ फिर भी उसने एक आस लगाई थी।

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