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कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

बहुत कष्ट सहे जिनका गोकुल में जन्म हुआ दुष्ट के साथ कूटनीति, गीता का ज्ञान दिया ना जाने कितने असुरों ने मारने का प्रयास किया फिर भी इतिहास रचा ,धर्म और प्रेम को मान दिया ❣️❣️ हैप्पी कृष्ण जन्माष्टमी »

संगत

POETRY ON PICTURE CONTEST JANMASTMI लेखक नाम मनीष देव त्रिपाठी संगत आया टोली संग माखन खाने आया कान्हा ले अपनी संगत देख मोहे भाग चलल कान्हा की संगत कुछ छिप परदे कि आड़ से देखत आज पकड़ में आये कान्हा माखन गिराये कान्हा कटोरे का भूमि पे| »

पत्थर से पंगा मत लेना

दोष नहीं दर्पण का थोड़ा सदा सत्य दिखलाता है। कपटी क्रूर कपूत घमण्डी दर्पण को दोषी कहता है।। सत्य असत्य के चक्कर में पत्थर से पंगा मत लेना। देख ‘विनयचंद ‘सीसा हो तुम इसको मत भुला देना।। »

माखन की चोरी

मनमोहक छवि मनमोहन की और मनहर है हर लीला उनकी। आनन्दकन्द आनन्द सबन हित घर-घर चोरी की माखन की।। »

रक्षाबंधन

आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं »

तरकश

अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी, हार से पहले रोता क्यूं है। इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग, कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,। पलकें भिगोता क्यूं है। »

रंगों का खेल

रंगों से ही समा बांधे जाते हैं, रंगों से ही ये ज़मीं आसमां जाने जाते हैं। जनाब पर अब तो रंग भी धर्म के नाम पर बाँट दिये जाते हैं, और ये रंग गुरूर की मिसाल बन जाते हैं। रंगों के कारण भेद भाव होता देखा है, पर अब तो रंगों के साथ भेदभाव होता है। डर लगता है प्रकृति हरी देख कर मुसलमान को न दे दें, खून लाल देख कर हिंदू का हक न जम जाए। गुज़रिश् है की रंगों को मन की खुशियाँ ही बढ़ाने दो, वरना जहाँ में भी सर... »

हे राम

हर सुबह हर शाम मेरे मुख से निकले तेरा नाम हे राम हे राम हे राम।। »

बहते पवन को किसने देखा?

न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? जुल्फ चुनरिया उड़ते जब जब। बहती हवाएँ समझो तब तब।। बादलों को जो चलते देखा। बहते पवन को उसने देखा।। न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? चहुदिश बजती एक सीटी-सी। तन को ठण्ड लगे मीठी-सी।। बृक्ष लता सब हिलते देखा। बहते पवन को उसने देखा।। न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? रोसैटी के ये भाव मनोहर। शब्दों के एक हार पिरोकर।। ... »

लगाव

दिल में लगा एक घाव हो गया हर प्रश्न का जवाब हो गया हमे पता ना चला शायद हमे भी उनसे लगाव हो गया ! देर तक सोते थे अब खुली आँखों का ख्वाब हो गया उसके आने से ज़िन्दगी में सब कुछ लाजवाब हो गया मुझे समझने वाला वो खुली किताब हो गया ज़िन्दगी की दौड़ में जीता वो खुशियों का ख़िताब हो गया अभी मिले ही थे नजाने कहा गायब हो गया उसके ना मिलने पर आँखों से आंसू निकले तब हमे पता चला हमे भी उनसे लगाव हो गया »

खामोश लब

अपने खामोश लबों को कुछ शरारत तो दे दो। मुझे बात करने की थोड़ी इजाजत तो दे दो।। »

मुक्तक

हम कवियों की श्रेष्ठता का निर्णय जबसे सॉफ्टवेयर करने लगा, तब से हम इतने सुपरफास्ट हो गए, कि एक घंटे में बीस बीस कवितायें लिखने लगे, एक घंटा कहाँ हम लगातार चार पांच घंटे के भीतर सौ मौलिक कवितायें लिखने में सफल हो गए, और श्रेष्ठ हो गए, सॉफ्टवेयर बेचारा क्या जाने हम अपनी मौलिक लिख रहे हैं या जोड़ तोड़ से, लेकिन सॉफ्टवेयर अचंभित तो ही रहा होगा कि हम सुपरफास्ट हो गए »

छतरी (काव्य प्रतियोगिता)

फिर याद आया मुझे, सावन के वो…. दो पहरी। भीग रहे थे हम दो, थी हमारे पास एक ही छतरी।। उनसे कभी चिपक जाना, फिर अलग हो जाना। हवा के झोंको से कभी, उड़ जाती थी अपनी छतरी।। धीरे धीरे कदमों से कदम, मिला कर आगे बढ़ना। खींचातानी की आ जाती नौबत, थी एक ही छतरी।। बूढ़े बरगद के नीचे ठहरना, मीठी मीठी बातें करना। बात बात पे घुमाते थे, कभी कभी हम अपनी छतरी।। सुनसान राहों में जब कोई राही पे, नजर पड़ जाता। हम ... »

14 जुलाई

आज 14 जुलाई है, फरवरी नहीं जो तेरे लिए शायरी लिखूँगा मैं डूब चुका हूँ पहले भी किसी आँखों में अब बार-बार थोड़े ही डूबूंगा। »

झुकी हुई नज़रें

झुकी हुई नज़रें उतनी ही हसीन लगती हैं, जितना खुली हुई शराब की बोतल। »

शोहरत

दौलत चाहे जितनी कमा लो पर शोहरत कमाने में जमाने लग जाते हैं। »

गुरुर

सुविचार:- कभी-कभी अपनी बात पर अटल रहने से झुक जाना ही अच्छा होता है। जैसे जब आँधी आती है तो बड़े पेड़ गिर जाते हैं। क्योंकि वह अपनी अकड़ में होते हैं परंतु छोटी-छोटी झाड़ियां मगन होकर नाचती हैं क्योंकि उन्हें गुरूर नहीं होता और वह झुकी रहती हैं। »

विपक्ष की राजनीति

यह विपक्ष की कैसी राजनीति? अपने आप ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं। अपने नेताओं की फोटो खुद ही फाड़ते हैं और जब उनके नेता दूसरी पार्टी में जाते हैं तो ताने सरकार को मारते हैं। कांग्रेस मुक्त भारत कांग्रेस के सहयोग से »

लेख:- आत्महत्या

शीर्षक:- “जीने का लें संकल्प, आत्महत्या नहीं है विकल्प” आत्महत्या यानी खुद ही खुद की हत्या कर लेना।अपने आप ही अपने प्राण ले लेना अर्थात् आत्महत्या कर लेना उचित नहीं है। आत्महत्या एक जघन्य अपराध है।ईश्वर के द्वारा दिये गये अनमोल जीवन की लीला समाप्त कर लेना, एक अनुचित कार्य है। सभी के जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ कभी न कभी अवश्य उत्पन्न हो जाती हैं, जब व्यक्ति को उन समस्याओं से निकलने का को... »

दगाबाज़

झूठे थे वादे सभी झूठे तेरे इरादे भी लफ्ज़ भी शर्मिंदा है तुझे बयाँ कैसे करें कुत्सित तेरी सोच थी कुटिल थी फितरत तेरी लफ्ज़ भी शर्मिंदा है तुझे बयाँ कैसे करें ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

अपनों में बेगाना

मैंने तुझे जितना समझाया तू क्यों उतना बिफरता गया तुझे राह सच की दिखाई जो तू क्यों फिर भी बिगड़ता गया तुझे सुलझाने की कोशिश की तू क्यों उतना उलझता ही गया क्या वजह है तेरी नाराज़गी की जो जुदा तू सबसे यूँ होता गया आ अपने दिल की बात कहले अब अपनों में ना रह यूँ गुमशुदा ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

ज़िन्दगी खूबसूरत है

ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो छोड़कर द्वेष का भाव हँस कर सबसे मिलो किसी की कष्ट न दो मुस्कराहट की वजह बनो ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो सही कहा गया है कर्म का फल कहाँ जाता है जो देगा तू वही पायेगा तेरा किया आगे आएगा ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

सुप्रभात

फिर हुआ नई सुबह का आगाज़ है नया दिन नयी उम्मीदों का राज है चहचहाते पंछियों की गूंजती आवाज़ है सरसराती सुबह की ठंडी बयार है उस पर पड़ती सावन की फुहार है हर तरफ सुहावने मौसम का राज़ है ये चमकती किरणे पुकारती हैं सबको जागो उठो खुल कर मुस्कुराओ स्वागत करो दोनों बाहें फैलाकर तुम्हारे सामने खड़ा तुम्हारा आज है सुप्रभात ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

कभी तो बेवजह मुस्कुराओ

खुशियों को आने का मौका दो कभी तो बेवजह मुस्कुराओ यक़ीनन बहारें लौट आएँगी तुम ज़रा धीमे से खिलखिलाओ ढलती उम्र सी हर पल ये ज़िन्दगी ज़र्रा ज़र्रा हाथ से फिसलती है ज़िन्दगी सोचते क्यों हो मुस्कान के लिए ये तो सुकून देगी यूँ विराम ना लगाओ खुशियों को आने का मौका तो दो बस कभी बेवजह ही मुस्कुराओ मत चूकना किसी के होठों पर मुस्कान देने को ज़िद छोड़कर अहम् तोड़कर सबको गले लगाओ वक़्त ठहरता नहीं किसी के लिए तुम खुशनसीब... »

शुभचिँतक- कविता

वो सब्र का पाठ तो पढ़ाते थे बेसब्र ना हो,सब ठीक होगा ! फिर इम्तिहानों के दलदल में खुद बेसब्र हो,अकेला छोड़ जाते थे! हालातों से लड़ते हम वहीँ के वहीँ रह जाते थे! वो आकर अक्सर,हमको ढाँढस बंधाते थे दर्द को सहन करो सब ठीक ही होगा ! फिर वैसे ही ज़ख्मों को कुरेदकर नमक छिड़कते चले जाते थे ज़ुल्म सहन करते हम वहीँ के वहीँ रह जाते थे! वो आते,आकर बड़ी हिम्मत दे जाते थे, मज़बूती से आगे बढ़ो सब ठीक होगा! और फिर उन हाला... »

Shayari

खौफ खातीं है सर्द मौसम की हवाएं भी मुझसे सीने में दहकते सूरज सी जिंदादिली रखती हूँ हौसला परवान पर है उम्र हारी है ढलती उम्र है तो क्या जज़्बा ज़िन्दगी जीने का, खुद के दम पर रखती हूँ ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

ज़िन्दगी की किताब

गहनता से लिख रही हूँ मैं लफ्ज़ कम लगते हैं गर लिखने बैठो ज़िन्दगी की किताब चंद लम्हे फुर्सत मिली बाकी रहा ज़िम्मेदारियों का दबाव यादों को तक सँजो ना सके रखते रहे पल पल का हिसाब बड़ा कठिन है ज़िन्दगी में उसूलों पर चलना वक़्त के साथ सलीके में रहना कभी तो बड़ा दर्द देता है भावनाओं का बिखरना बैचैन किये रहता है इनका सुख दुःख में बँट जाना उलझने फँसाती जातीं हैं बेहिसाब अंदाज ए ज़िन्दगी बड़ा लाजवाब काश कभी कोई इत... »

स्वप्न या भ्रम – कविता

हर रोज़ पहुँच जाती हूँ उस श्वेत निर्मल घरोंदे में न जाने किस जन्म की कहानी शायद कैद है उन दीवारों में जहाँ पहुँच कर अतीत के पन्ने करवटों की तरह बदलते है शीतल पवन निर्मल सी बहती है पुकारती हो जैसे मेरी पहचान को वो बयार कुछ फुसफुसाती है जैसे अतरंगता मेरे प्रेम की बयान करके चली जाती हैं कोई याद मेरे पूर्वजन्म की सिमटी है उन गलियारों में क्या कोई रूहानी ताकत मुझको बार बार बुलाती है क्या अतीत था मुझसे ज... »

ना…री – कविता

ना…री तू बिलखना नहीं किसी सहारे को अब तरसना नहीं तू स्वयंसिद्ध और बलवान है नहीं महत्वहीन तू खुद सबकी पहचान है सशक्त है तू नाहक ही छवि तेरी कमज़ोर है पर तेरे जोश का हर कोई सानी है सबल ममतामयी गुण तुझमें चेहरा अद्भुत जैसे माँ शक्ति भवानी है आदिकाल से तू है इतिहास रचयिता हर जीत में भी सहभागी है परचम लहराए हैं तूने भी अनमोल बड़ी तू अति प्रभावशाली है तेरी क्षमता का जिनको ज्ञान नहीं वो भी इक दिन नतम... »

विजयी भव

मुश्किलें किसके जीवन में नहीं आतीं ये दृढ़ता से समझना होगा खुद की कोशिश नाकाम नहीं होतीं विजय पथ पर खुद अग्रसर होना होगा जब कोई अपने हिसाब से लड़ता जाता है कुछ बेख़ौफ़ बढ़ते रहते हैं कुछ थक हार मान लेते हैं कुछ सहारों की तलाश करते हैं कुछ टूट कर बिखर जाते हैं मुश्किलों का अफ़सोस न करना ये तो ज़िन्दगी का अबूझ हिस्सा है अगर मगर में क्या बंधक होना हर सफलता से जुड़ा एक कठिन किस्सा है आसमाँ की लगन गर लगी है तो... »

कुछ अनकही – कविता

वो प्रीत के मनोरम स्वर्णिम पल दफ़न क्यों हुए चारदीवारी में, वो जुड़ रही थी या टूट रही थी जलते से या बुझते अरमानों में, वो प्रेम या वेदना के पल कहूं या तार तार हुआ सपनो का महल कौन देगा उस दुःख को गठरी का हिसाब जो करुण क्रंदन करती ये चौखट बेहिसाब गवाह तो सब है गुजरती है वो किस पीड़ा से ये चरमराते द्वार ये खटखटाती खिड़कियाँ ये सीलन मैं उखड़ती दरो दीवार क्या उकेरूँ शब्दों मैं उसकी छुपी दास्ताँ को कैसे लिखू... »

डर

डर का वजूद कुछ नहीं ये स्वयं जनित मनोभाव है आसन्न खतरे की चिंता से उत्पन्न भय निराशावाद है एक अंतहीन भ्रम की स्थिति हक़ीक़त के धरातल पर भय का ना कोई ओर छोर है किसी कार्य के क्रियान्वन से पहले उद्विग्न मन में उठा ये शोर है अरे! मुझे डर लग रहा है डर का दबदबा कायम है हमारे मन मस्तिष्क में, बड़े शातिर अंदाज़ हैं इस डर के हावी रहता है कल्पनाओं पर मिल जाता है जाकर अतीत में रोकने को तैयार जैसे जीत के मंज़र का... »

अमर प्रेम

दो दिल जुड़ते हैं जब सच्चाई से चंचलता निरंतर जवान होती हैं किसी से प्यार हो जाना बेहद सुखद अनुभूति हैं खुशनुमा अहसासों में डूबकर कल्पनाएँ सोती हैं आलिंगन किये रहते हैं उमड़ते जज़्बात हर पल ऐसा सच्चा प्रेम जहाँ पूर्णतः भावनाएं निश्छल दूर होकर भी ये वियोग कभी नहीं अपनाते हैं सच्चे प्रेमी विरह में भी मिलन के ख्वाब सजाते हैं ऐसा अटूट प्रेम जब कभी दो आत्माओं को मिलाता है जन्मो जन्मों तक के लिए प्यार अमर ह... »

कानून का हत्यारा

कानून के दहलीज़ पर पहुँचने से पहिले मारा गया कानून के रक्षक का हत्यारा। कोई तो बतलाओआखिर कब तक जिन्दा रहेगा बाँकी कानून का हत्यारा।। »

नागपंचमी

बेशक जहरीले होते हैं फिर भी इनकी होती अर्चन। कालव्याल से कालक्षेप हित करते हम सब वन्दन।। ऐसा धर्म सनातन अपना जिसका न कोई शानी है। ‘विनयचंद ‘ संग सारी दुनिया दिल से ये सब मानी है।। नागपंचमी की बधाई »

सावन में

बरस रहा सावन देखो अपने आंगन में। तृण तरुवर सब नहा रहे निज कानन में।। »

Dosti Shayari

Dosti Shayari क्या रूप दोस्ती का क्या रंग दुश्मनी का, कोई नहीं जहाँ में कोई नहीं किसी का। »

सावन की फुहार

बरस रही सावन की फुहार रिमझिम -रिमझिम रिमझिम -रिमझिम। धरती पर छा गई बहार आओ नाचें छम-छम छम-छम छम-छम।। »

किरदार

जटिल है किसी को पूर्णतः समझना  अस्थिरता रहती है सबके जीवन में क्यों मानक तय करना किसी के लिए गुज़रता है हर कोई अलग संघर्षों से हर शख्स में दो किरदार जीवित हैं  अपनी सच्चाई अपने ही साथ है  हम किस किरदार को जीना चाहते हैं  ये निभाना भी सिर्फ अपने हाथ है  कोई इतना अनुभवहीन नहीं यहाँ  हर बंदा परिपक्व ही दिखता है  विचारों में भिन्नता हो भी तो क्या  ज़रा सा संभल रिश्तों को जीवित रखता है »

गुरु के चरणकमल

गुरुवर तव चरणन में, है तीन लोक राजित। जिसने लिया सहारा, वो खुशियों में विराजित।। लाखों कमल है जग, तव चरण कमल आगे। दिल में बसा ‘विनयचंद ‘ बन जाओगे बड़भागे।। »

कवि

कवियों की तो बात ही कुछ और है | सोच की उनका नहीं कोई ठौर है, मन की गति उनकी , प्रकाश से भी तेज़ है| दुनिया में उनसे आगे , नहीं कोई विशेष है || न जाने कितनी ही तुलनाएँ कर जाते हैं | कितनी ही उपमाएँ दे जाते हैं, कभी प्रक्रति को मनुष्य से भाँपते हैं| तो कभी जीवन के उद्येश्य को विचारते हैं || कभी एक तिनके को बलवान बता देते हैं | कभी सर्वोत्तम को भी निष्फल बता देते हैं, कभी अंधेरी गुफाओं का भेद देते हैं... »

…….गुज़र जाएगा…..

( दुनियां ) एक सोच में डूबी हूँ क्या करूँ और किस काम को छोड़ दूं…. महाकाल , भयावह काल , कोरोना काल का यह समय किस तरफ़ मोड़ दूँ….. समय माँगे जा रहा है फ़िर से समय रुको वहीं , थोड़ा थम जाने दो बुरा वक़्त है….. अपने समय से ये भी पलट जाएगा गुज़र जाएगा….. ये मुश्किल समय भी नई खुशियां लाएगा….. ( डॉक्टर ) होते ना आप सब साथ , जंग शुरू में ही हार जानी थी जुड़े हाथ से हाथ और क़िस्मत को ... »

योग दिवश पर विशेष

योग के अलौकिक गुणों के माध्यम से कोरोना को दें मात रोगी के शरीर को योग के माध्यम से धीरे धीरे रोग मुक्त कर दें उसे हम योग कहते हैं योग के कई परिभाषा हैं। योग बहुत ही प्राचीन एवं धार्मिक पध्दति हैं जिसका उल्लेख वेद पुराणों में भी मिलता हैं। योग के दम पर ही हमारे ऋषि महात्मा अपने शरीर को रोगमुक्त एवं बलशाली बनाते थे जिसके बल पर ऋषि मुनि वर्षों तक जीवित रहते थे। योग एक ऐंसा साधन है जिसे निरन्तर करने ... »

कैसे कहूँ?

कैसे कहूँ, किससे कहूं कि हाल ए दिल क्या है, रोना अकेले ही है अंजाम ए बयान क्या है। जब तक खुश रहती हूँ, लोगों की हंसी सुनाई देती है। जब दुखी होती हूँ बस अपनी चीख सुनाई देती है। बाते बहुत है पर डर लगता है कुछ कहने से, बहुत से किस्से हैं दिल के कोने में सहमे से। डर लगता है लोग क्या कहेंगे, क्या सोचेंगे मेरी बाते सुनकर। इसीलिए मैंने भी खुद को छुपा लिया कुछ किरदार चुनकर। खुदको खोने का डर भी सताता है, आ... »

पाकिस्तान के दो टुकड़े

1971 में जब इन्दिरा गाँधी जी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किये थे। तब चीन मुँह ताकता रह गया था। उफ़ तक ना निकली थी मुँह से और अमेरिका, रूस जैसे देश चूँ तक ना बोले बस दाँतों तले उंगली दबा कर रह गए। ऐसा था आयरन लेडी का फैसला और भारत का औधा। जिसे मोदी जी ने भी बरकरार रखा है। आज भी हर देश भारत की सराहना करता है। और सम्मान से देखता है। मैं इन्दिरा गाँधी जी के इस फैसले की सराहना करते हुए उन्हें नमन करती हूँ।... »

चीन को

जीत जायेंगे हम क्योंकि हमारे बाजुओं में है दम चीन को उसके घर तक खदेड़ आएगें हम »

मेरा लाल

रो-रोकर परिजन का हो गया बुरा हाल मां पूछती है सबसे कहां गया मेरा लाल »

चीनी सामान

जिस तरह अंग्रजों के सामान को और उन्हें बहिष्कृत किया था। उसी प्रकार चीनी सामान को अपने जीवन से दूर करो। और आत्मनिर्भर बनो। अपनी दैनिक आवश्यकताओं का सामान खुद ही देश में बनाओ। »

चीनी सामान का बहिष्कार करो

चीनी सामान का बहिष्कार करो इसे अपने जीवन से दूर करो सरकार ने यह निर्णय लिया है आप भी यह निर्णय लेकर देश भक्ति की भावना दिखाओ। »

चार सिंघों की शहादत सलाम

शहीदों की सूची में पंजाबियों का नाम है अव्वल। आज भी चार सिंघों ने देकर शहादत काम किया है अव्वल।। प्रणाम करो ऐ ‘विनयचंद ‘ बार बार बन हम्बल। »

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