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जिंदगी

यह जो जिंदगी इतना सबक सिखाऐ जा रही हो मुझे अनुभवों का पुलिंदा बनाऐ जा रही हो जिंदगी है चार दिन की क्यों इतनी मगजमारी किऐ जा रही हो । »

लोहड़ी का त्यौहार

आजो सारे, आजो सारे ,रल मिल लोहड़ी पाइऐ, दुल्ला भट्टी दा गीत गा,विहड़े विच अलाव जलाइऐ, मूँगफली,गच्चक,रेवड़ी खाइऐ ते सबनू खवाइऐ, मक्की दी रोटी, सरसों दा साग,खीर बनाइऐ, पतंग उड़ाइऐ,नवी फसल दी खुशी मनाइऐ, शगुनां वाला त्यौहार है आया,नच टप धूमां पाइऐ। »

शायरी

मुक्त रुला देने वाली शायरी शब्द देख सब भुला देने वाली या तो हंसा देने वाली शायरी रास्ता भटकाने वाली या तो भटके को रास्ते पर लाने वाली शायरी और तो और फीकी जिंदगी में उत्साह भर जाने वाली शायरी बताना लिखता हूँँ मैं इस कलम से डायरी भर जाने वाली या तो दिल को छू जाने वाली शायरी »

हिन्दी का समुचित विकास कैसे हो?

आखिर हिन्दी का विकास कैसे हो, एक विचारणीय विषय है। हिन्दी दिवस पर अपने मित्रों एवं सहकर्मियों को बधाई देकर एक औपचारिकता पूर्ण करने मात्र से क्या हिन्दी का विकास हो जाएगा। पूरे सप्ताह भर या फिर पन्द्रह दिन का हिन्दी पखवारा महोत्सव मना लेने मात्र से क्या हिन्दी का विकास हो जाएगा। यह एक यक्ष प्रश्न है। वास्तव में ,अपने देश में वर्तमान कालीन परिवेश में भाषा तीन स्वरूप में है। १. मातृभाषा, जो परिवार से... »

जिंदगी इक तमाशा

जिंदगी इक तमाशा है तमाशा वेखण आया ऐ बंदिया तु वेख जी भरके ज़माने दे रंगां नु पर किसे दा तमाशा बनावी ना ते आपनां भी विखावी ना। »

कविता लिखने की कला

आओ बच्चों तुम्हें सिखाए कविता लिखने की कला। कुछ शब्दों को ध्यान में रखो मिल जायेगी काव्य कला।। कल खल गल घल -घल घल । चल छल जल झल -झल झल।। डल ढल डल टल -टल टल । तल दल नल थल -थल थल।। पल फल बल मलमल मल। रल शल हल कलकल कल।। यही सार्थक शब्द हैं प्यारे। रल मिल बना कवित्व रे प्यारे। »

टिम टिम करते लाखों तारे

टिम टिम करते लाखों तारे *********************** टिम टिम करते लाखों तारे। देखो लगते कितने प्यारे।। सुन्दर आकास सजा है ऐसे। हीरे-मोती से थाल भरा है जैसे।। बैठ के अंगना सदा निहारूँ। एक भी मोती कभी न पाऊँ।। एक तो आओ मेरे आंगन। साथ में खेलूँ होय मगन।। एक तारा जब टूटा था। शुभ सगुन ये छूटा था।। एक मनौती पूरण कर दो। खाली झोली मेरी भर दो।। चंदा को अपने पास रखो। चंदा सम वीरा खास करो।। सबकी मनौती पूरी होती। ... »

मुख खोलो

मुख खोलो कुछ बचन कहो इसमें क्या कोई घाटा है। रौनक क्योंकर खोई -सी है आज पटल पर सन्नाटा है।। »

लेख:- ब्राण्डेड बुखार

लेख:- ‘ब्राण्डेड बुखार’ आजकल हर व्यक्ति अपने निजी काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करने मे विश्वास रखता है। सबसे ज्यादा ध्यान तो इस बात पर रहता है कि हम अच्छा खाये,पिये और पहने। अब व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को निखारने और प्रभावशाली बनाने के लिये प्रयासरत रहता है। वह सोचता है कि वह सबसे अच्छा दिखे। इसलिये वह अनेक प्रयास और उपायों को अपनाता है। अपनी सुन्दरता,आकर्षण और व्यक्तित्व विकास हेतु वह म... »

बड़ा हसीन रहा यह साल

सच कहूं तो बड़ा ही हसीन था यह साल, हर एक ने अपना रंग दिखा दिया…🐊🐍 »

वक़्त की ताकत

बीत जाएगा यह वक़्त भी वक़्त कभी थमता नही अगर थमता तो वक़्त कहलाता नही एक दिन यह वक़्त इतिहास बन जाएगा इतिहास दोहराया जाता है इतिहास दोहराया जाएगा वक़्त कभी थमता नही यह वक़्त भी बीत ही जाएगा यह इतिहास सदियों की विरासत कहलाएगा। »

परम सुख मिलने ब्रह्मचर्य से

ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है, अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है ।। कवि विकास कुमार »

पढ़गो तभी लिखोगो

वही रचेगा नया रचना जो पढ़ेगा किसी का रचना ————————- माना कविता लिखना होता है ईश्वरीय वरदान लेकिन कवि भी होता है एक प्रकार का हरि का खास संतान ——————————————————————- राम भक्त विकास कुमार »

उक्ति

यदि पढ़ोगो मन से किसी का कविता तो जरूर मिलेगा कुछ नया सीखने का संदेशा ————————————————— कवि सिर्फ वहीं नहीं है, जिन्हें इस धरा की शान मिली है कवि तो वो है, जिसको उसने मान दिया है ।। राम भक्त विकास कुमार »

मेरे लिए इतना काम करो मेरे दोस्त

vikashkrkamti4576@gmail.com मेरे लिए इतना काम करो मेरे दोस्त अपनी मौलिक रचना हमे EMAIL (vikashkrkamti4576@gmail.com) पर भेजो मेरे दोस्त — MOBILEमें चलती नही मेरे SAAWAAN REDEFINING POETRY APP LAPTOP में DATA की होती जाती है कमी, तो हम कैसे पढ़ पायेंगे आपकी POETRY — मेरे लिए इतना काम करो मेरे दोस्त अपनी मौलिक रचना हमे EMAIL पर भेजो मेरे दोस्त ।। — नोट- मेरे MOBILE में SAAWAAN REDE... »

पूरा जरूर पढ़े

पूरा जरूर पढ़े, मैं विकास कुमार, मोबाल सैमसंग जेड 2 , जिसमें सावन ऐप काम नहीं करता, हम अभी LAPTOP से लिख रहे हैं । हम समूह में एक्टिप नहीं रह पाते, क्योंकि LAPTOP तो हर वक्त हाथ में रखकर चलाया नहीं जा सकता । सच जो आप सभी लोगों के लिए जानना जरूरी चाहिए । मैं बिहार का हूँ, जिला मुजफ्फरपुर, थाना कटरा, घर मोहनपुर , प्रसिद्ध स्थान — चामुण्डा मंदिर । योग्यता … बारहवीूं उत्तीर्ण ( वाणिज्य ) ज... »

अनोखा जी चले बाजार

अनोखाजी चले बाजार। टौर से हो फटफटि सवार।। साथ में चली श्रीमति जी। चहक रहे थे आज पतिजी।। कितने अच्छे हैं टमाटर। आओ खरीदे साथ मटर।। क्या यार तुम भी हद करती हो। क्या फिर साॅपिंग रद करती हो? फेरीवाला था एक फुटपाथ पे। लेकर बैठा वस्तु बहुत साथ में ।। छलनी सूप और झाड़ू पोछा । आओ खरीदे चलकर सोझा।। बस भी करो यार। ये कैसा बाजार।। मोहतमा गुमसुम चलती रही। कुछ बातें उसको खलती रही।। जैसे दिखा एक बर्तन दूकान। फू... »

कृष्णा भजन

कृष्णा जी की प्यारी ,राधा न्यारी बसो मोरे मन मन्दिर बिहारी,संग वृषभानु दुलारी तुम बिन कोई ना ठौर हमारी, जाऊँ बलिहारी पल पल याद करूँ त्रिपुरारी, आऐ शरण तिहारी कृष्णा जी की प्यारी, राधा न्यारी बसो मोरे मन मन्दिर बिहारी, संग वृषभानु दुलारी मुखड़ा तेरा नूरानी, तेरा मेरा रिश्ता तो रूहानी दाता अपनी है यारी पुरानी, हमको चरणन से ना बिसारी कृष्णा जी की प्यारी, राधा न्यारी बसो मोरे मन मन्दिर बिहारी, संग वृष... »

ब्रह्मचर्य के ्

ब्रह्मचर्य के अभाव में हो रहा युवाओं का पतन अब कौन-सी शिक्षा देती व्यवस्था कि बलात्कार कर रहे हैं लोग ।। कवि विकास कुमार »

उफ्फ़

उफ्फ़ ,यह सर्द हवाऐं मद्धम सा सूरज ना बाहर बैठा जाए ना भीतर चैन आए। »

लगा दो फाँसी मुझे

लगा दो फाँसी मुझे, मैं खुशी से झूम जाऊँगा । मैं भारत का लाल हूँ, अन्याय के विरूद्ध बिगुल फूँक दुँगा ।। कवि विकास कुमार »

‘मातृभाषा एकमात्र विकल्प’

लेख:- ‘मातृभाषा एकमात्र विकल्प’ मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने के लिये भाषा का प्रयोग करता है। वह अपनी बात लिखित,मौखिक व सांकेतिक रूप मे दूसरे तक प्रेषित करता है। भाषा संप्रेषण का कार्य करती है। यह आवश्यक वार्तालाप,भावनाओं,सुख- दुख और विषाद को प्रकट करने मे सहयोग देती है। भारत देश मे लगभग तीन हजार से ज्यादा क्षेत्रीय व स्थानीय भाषाओं का प्रयोग लोगो द्वार... »

एकादशी नामावली

मार्गशीर्ष मास अतिपावन। उत्पना व मोक्षदा सुहावन।। सफला अरु पुत्रदा एकादशी। पौष मास मह बहु सुखरासी ।। षटतिला अरु जया बड़नामी। माघ मास के उत्तम फलकामी ।। विजया आमलकी फागुन मास। पापमोचनी कामदा मधुमास।। बरुथिनी और मोहिनी बैशाखे। जेठ अपरा व निर्जला आखे।। योगिनी देवशयनी कहलावे। आषाढ़ महिने में मन भावे।। पवित्रा पुत्रदा सावन मासा। अजा परिवर्तनी भादो माना।। आसिन इन्दिरा पाशांकुशा आवे। रमा देवोत्थानी कार्त... »

बड़ी अजीब है ये घुँघरू

बड़ी अजीब है ये घुँघरू। बन्धे जब दुल्हन के पैरों में बड़े खुशनसीब है ये घुँघरू।। झनकती जब ये कोठों पर बड़े हीं गरीब हैं ये घुँघरू । बांध के किन्नर भी नाचे पर बदनसीब है घुँघरू।। पीतल के हो या हो चांदी के कला के नींब है ये घुँघरू। विनयचंद साहित्य सरगम के सदा करीब है ये घुँघरू।। »

(लेख) नारी

आज नारी के पास क्या नहीं है। फिर भी पुरुष उसे अपनों से कमजोर ही समझ रहे है।जबकि,आज हमारी सरकार नारी के प्रति तरह तरह के शिक्षा दे कर पुरुष के मुकाबले में खड़ा करने का प्रयास कर रही है। यहाँ तक कि नारी प्रधान कई फिल्में भी बनी। अनेक साहित्यकार कलमें भी चलायी। सरकार नारी को नौकरी में आरक्षण भी दिया। नारी बखूबी मेहनत करके आई पी एस, जिला कलेक्टर, प्रोफेसर, पायलट व डाक्टर भी बन कर ज़माने को दिखा दी। फि... »

हम किसान धरने पर

एक तो शीतलहर दूजा बेगाना शहर। फिर भी अटल रहेंगे हम किसान धरने पर।। हम क्यों माने हार बंधु हम तो हैं अन्नदाता जग में। पेट चले संग फैक्टरी चले व्यापार पले अपनी पग में।। मांग नहीं अपनी सोना है ना मांगें हीरा-मोती हम। अपनी फसल के घटे दाम कभी न बर्दाश्त करेंगे हम।। आलू होवे दो की अपनी लेज बिके चालीस की। अपना चिप्स बना खाऐंगे मनो बात ख़ालिस की।। विनयचंद ना दुखी रे जिसका हम सब खाते हैं। हट जा बादल नभ मंड... »

सुप्रभात लिखते लिखते

सुप्रभात लिखते -लिखते फिर से सबेरा हो गया । उपालम्भ आया फिर भी आखिर ऐसा क्या हो गया? »

ममता

ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे। निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।। श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे। निश-दिन मूषक मरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै »

ममता

ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे। निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।। श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे। निश-दिन मूषक भरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै।। »

सावन पे

लेके छठी मैया का प्रसाद हम आए आज सावन पे। मैया का गाए गुणा नुवाद देखो आज सावन पे।। जीवन में ना होवे विषाद अपने प्यारे सावन पे। कृपा प्रसाद रहे आबाद अपने प्यारे सावन पे।। »

सुस्वागतम् पाण्डेयजी

सुस्वागतम् पाण्डेयजी क्या आप में आकर्षण है मंच पर आने से सिर्फ सावा घड़ी पहले खींच लिया मेरे दिल से कविता। बीत गई वो रातें काली नव प्रभात ले आया सविता।। »

महापर्व

विविध आबम्बरो से दूर, श्रद्धा-आस्था से सरावोर महापर्व है छट्ठ, जन-गण है उपासक, आराध्य है दिनकर! »

किन्नर

प्यार दूर की बात सम्मान कभी सपने में भी ना सोचूं तुम तो देखने से भी कतराए देख कर नज़र फेर ली फिर कहते हो मेरी दुआओं मे बड़ी ताकत हैं जल्दी कबूल हो जाती है अगर तुम कहो दुआओं के मैं बादल बरसा दूं बस एक बार जो जन्म से मिला अधूरापन तुम उसे भुला इन्सान समझ लेना कभी बदन से नजरें उठा तानों से छलनी रूह को निहारना कभी सम्मान की नजरों से देख पड़ना हमारी नज़रों की बेबसी किन्नर नही हमें हमारे नाम से पुकारना भ... »

जितने बदले नंबर तुमने

जितने बदले नंबर तुमने —————————— जितने बदले नंबर तुमने हर नंबर तेरा मिल सकता , स्वाभिमान है बीच में आता है, क्योंकि तुने ही मुझे ठुकराया है, मत सोच हमें कोई नहीं मिल सकता, पहले , अब भी , मिले थे ,कईयों चेहरे, खुदा ही जाने क्यों तेरा चेहरा भाता है, रोने के लिए या- कुछ करने के लिए, खुदा ने ऐसा दिन दिखलाया है, बस इतना किसी के फोन से कह दे, ह... »

यादों में रहेगी

यादों में रहेगी —————— बेचैन सा रहता हूं, बन पागल फिरता हूं, मिल जाए मुझे पुनः, हर रोज दुआएं करता हूं, मान दी हमने कई मन्नते, कभी मस्जिद में भी चादर चढ़ाया करता हूं, खुदा खुशनसीब हूं या बदनसीब हूं, आज आखिरी बार तुझसे, यह बात पूछने आया हूं, मिले मुझे तकदीर कहूंगा ना मिली मुझे ना फिर किसी से प्यार करूंगा, मेरी थी मेरी होकर रहेगी, हो हकीकत ना पर यादों में रहेगी, &#... »

तकिया

तकिया ————- रोती रही कईयों दिन तक, दोस्त खबर भी देते रहें, हम भी रोते घर बैठे, जब कोई पूछे हाल मेरा, झूठी हंसी दिखाते रहें, कब सोया कब जागा हूं, मैं जानू या रात ही जाने, आकर देख मेरे तकिए को है गीली आंसू से, उसे नहीं सिखाया हूं, कैसे धूप में रख दूं उसको, तकिया है कपड़ा ना, डरता हूं घरवालों से पूछेंगे कैसे भीगी कुछ भी जवाब दे पाऊं ना ——————... »

भूल नहीं सकते

भूल नहीं सकते ———————– भूल नहीं सकते वो रातें, वो मनहूस घड़ी थी या मेरी किस्मत फूटी, एक नादानी से जंग छिड़ी, जब से बिछड़े ना कभी मिले, कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका, खबर मैं ले लूं – जब जब याद सताए चेहरा उसका ——————————————- **✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’&... »

ग़म

है गम नहीं कि, खर्च हो रहा हूँ, जिंदगी के सारे, मर्ज ढ़ो रहा हूँ, ज़रा मुगालते में था अब तक। अब सिर्फ अपने, सपने जी रहा हूँ. »

लतड़ पतड़ स्यां स्यां (गढवाली हास्य)

लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां नोना बेरोजगार छन अभी नि आई कालो धन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां मंत्री जी की गाडी बल दिनी छाई फुल होरन सड़की मा बल क्वी नि घूमा साइड दी दिया तुम फ़ौरन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां कुर्सी मा बिराजमान उत्तराखंड का बड़ा पधान दारू की फ़ैक्टरी लागली जनता को बल कुञ्ज घाण लतड़ पतड़ स्यां स्यां... »

हर शाम

हर पल लगता बहुत सीख लिया अब जीवन में भ्रम तोड़ जाती हर शाम इक नईं शिक्षा दे »

धर्मु झांझी (गढवाली हास्य)

कोराना से बल सबुकी हालत पस्त हुयीं च देश की अर्थब्यवस्था की भी हालत खस्त हुईं च रोजी रोटी कु जुगाड़ ह्वो न हो पर, दरोल्यों की एसूं दों बल फ्वां फ्वां हुयीं च सरकिर की भल मनसा ह्वो न ह्वो पर एक बात त 100% च कि धर्मुं झांझी बल देश की अर्थब्यवस्था की नींव बण्यूं च।। »

सपने

कौन कहता है कि अपने उज्जल भविष्य हेतु सपने देखना या कल्पना करना गलत है? सपने देखो और जरूर देखो, अपपे उज्जवल भविष्य की कल्पना करो और ऐसी कल्पना करो जो दूसरों को तो क्या बल्कि आपको खुद को असम्भव प्रतीत होती हो।। और कठिन प्रयास से उस असम्भव को सम्भव करके दिखा देना।। लेकिन आपने क्या सपना देखा है या क्या कल्पना की है यह तब तक किसी को न बताना जब तक आपका सपना हकीकत मे न बदल जाए।। क्योंकि यहां लोग आपके सप... »

रिश्ते

नहीं होता हर किसी के बस में रिश्तों को ताउम्र सम्भालना पड़ता है खुद को दांव पर लगाना। »

मन मन्दिर

सुस्वागतम् मैय्या आन बसो मोरे मन मन्दिर धड़कन मानिंद। »

सुविचारों का पिटारा (२)

आबाद होने के लिए दोस्ती अच्छी है, ——————————————- बर्बाद होने के लिए एक तरफा मोहब्बत | **************************** »

“सुविचारों का पिटारा”

पुरुष नारी से हर एक क्षेत्र में पीछे है देने में भी और लेने में भी| कैसे?? ————————————— नारी ममता, प्रेम और त्याग देती है अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए…. पर वही नारी जब आक्रोश में आती है तो बदला लेने में भी पुरुष से अधिक निर्दयी हो जाती है| “इतिहास गवाह है इस बात का” तो हो गया ना लेन-देन ! अब पुरूषो... »

प्रज्ञा के सुविचार

खूबसूरती चकाचौंध में नहीं मन में होती है इसीलिए कभी कोई चीज बहुत खूबसूरत लगती है तो कभी वही चीज बुरी भी लगती है… —————————————- आपने देखा होगा जब भूख ना लगी हो तो छप्पन भोग भी अच्छा नहीं लगता पर जब जोर की भूख लगती है तो कंकड़-पत्थर भी बहुत स्वादिष्ट लगते हैं स्वाद आने के लिए खाना नहीं भूख अच्छी होनी चाहिए… »

वो लड़का

उसके आँसू का संचय कर ईश्वर समंदर रचता है। प्रतीक्षा की पावन अग्नि में वो आहुतियों सा जलता है…!! जिसकी उदासी के रंग में ढलकर हुई ये रातें काली हैं, बीतें लम्हों की सोहबत में जिसने इक लंबी उम्र गुजारी है..!! वो जब भी कलम उठाता है, दर्द संवर सा जाता है, जिसकी मोहब्ब्त का सुरूर पल-पल बढ़ता जाता है…!! वो हर दिन हर पल चाहत की नई इबारतें गढ़ता है वो लड़का न कमाल मोहब्ब्त करता है..!! ©अनु उर्मिल ... »

निर्भया

कभी दिशा, कभी निर्भया,कभी मनीषा ,नन्ही बच्ची कोई, बस नाम अलग-अलग,कहानी सबकी एक, हर घड़ी डर का साया, ना जाने मर्द तुझे किस बात का घमंड है छाया, अबला होने का हर रोज एहसास करवाते हो, मेरी जान की कीमत बस तुने इतनी-सी लगाई, तेरी आँखों के सुकून से आगे बढ़ ना पाई, मेरे शरीर को मांस के टुकड़े से अधिक ना समझा, मेरी रूह में उतर जाने की तुने औकात ही नहीं पाई, ना सीता, ना द्रौपदी चल उठ अब बन झांसी की रानी तु,... »

कवि

ओ कवि, जरा सम्भल कर लिखना यह कविता नही परछाई है तेरी आत्मा का प्रतिरूप यह तेरे अन्दर छिपी भावनाओं की प्रतीक है अच्छे या बुरे उजागर हो जाओगे फिर दुराव- छिपाव ना रख पाओगे एक खुली किताब कहलाओगे उजागर अपनी हर पीड़ा कर जाओगे कलम तुम्हारा दृषिटकोण समझा जाएगी तुम्हारा हर अनुभव जग-जाहिर कर जाएगी फिर रहोगे ना खुद के ,बेपरदा हो जाओगे दर्पण सा ही अनुभव कर पाओगे । »

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