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हर शाम

हर पल लगता बहुत सीख लिया अब जीवन में भ्रम तोड़ जाती हर शाम इक नईं शिक्षा दे »

धर्मु झांझी (गढवाली हास्य)

कोराना से बल सबुकी हालत पस्त हुयीं च देश की अर्थब्यवस्था की भी हालत खस्त हुईं च रोजी रोटी कु जुगाड़ ह्वो न हो पर, दरोल्यों की एसूं दों बल फ्वां फ्वां हुयीं च सरकिर की भल मनसा ह्वो न ह्वो पर एक बात त 100% च कि धर्मुं झांझी बल देश की अर्थब्यवस्था की नींव बण्यूं च।। »

सपने

कौन कहता है कि अपने उज्जल भविष्य हेतु सपने देखना या कल्पना करना गलत है? सपने देखो और जरूर देखो, अपने उज्जवल भविष्य की कल्पना करो और ऐसी कल्पना करो जो दूसरों को तो क्या बल्कि आपको खुद को असम्भव प्रतीत होती हो।। और कठिन प्रयास से उस असम्भव को सम्भव करके दिखा देना।। लेकिन आपने क्या सपना देखा है या क्या कल्पना की है यह तब तक किसी को न बताना जब तक आपका सपना हकीकत मे न बदल जाए।। क्योंकि यहां लोग आपके सप... »

सपने

कौन कहता है कि अपने उज्जल भविष्य हेतु सपने देखना या कल्पना करना गलत है? सपने देखो और जरूर देखो, अपपे उज्जवल भविष्य की कल्पना करो और ऐसी कल्पना करो जो दूसरों को तो क्या बल्कि आपको खुद को असम्भव प्रतीत होती हो।। और कठिन प्रयास से उस असम्भव को सम्भव करके दिखा देना।। लेकिन आपने क्या सपना देखा है या क्या कल्पना की है यह तब तक किसी को न बताना जब तक आपका सपना हकीकत मे न बदल जाए।। क्योंकि यहां लोग आपके सप... »

रिश्ते

नहीं होता हर किसी के बस में रिश्तों को ताउम्र सम्भालना पड़ता है खुद को दांव पर लगाना। »

मन मन्दिर

सुस्वागतम् मैय्या आन बसो मोरे मन मन्दिर धड़कन मानिंद। »

सुविचारों का पिटारा (२)

आबाद होने के लिए दोस्ती अच्छी है, ——————————————- बर्बाद होने के लिए एक तरफा मोहब्बत | **************************** »

“सुविचारों का पिटारा”

पुरुष नारी से हर एक क्षेत्र में पीछे है देने में भी और लेने में भी| कैसे?? ————————————— नारी ममता, प्रेम और त्याग देती है अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए…. पर वही नारी जब आक्रोश में आती है तो बदला लेने में भी पुरुष से अधिक निर्दयी हो जाती है| “इतिहास गवाह है इस बात का” तो हो गया ना लेन-देन ! अब पुरूषो... »

प्रज्ञा के सुविचार

खूबसूरती चकाचौंध में नहीं मन में होती है इसीलिए कभी कोई चीज बहुत खूबसूरत लगती है तो कभी वही चीज बुरी भी लगती है… —————————————- आपने देखा होगा जब भूख ना लगी हो तो छप्पन भोग भी अच्छा नहीं लगता पर जब जोर की भूख लगती है तो कंकड़-पत्थर भी बहुत स्वादिष्ट लगते हैं स्वाद आने के लिए खाना नहीं भूख अच्छी होनी चाहिए… »

वो लड़का

उसके आँसू का संचय कर ईश्वर समंदर रचता है। प्रतीक्षा की पावन अग्नि में वो आहुतियों सा जलता है…!! जिसकी उदासी के रंग में ढलकर हुई ये रातें काली हैं, बीतें लम्हों की सोहबत में जिसने इक लंबी उम्र गुजारी है..!! वो जब भी कलम उठाता है, दर्द संवर सा जाता है, जिसकी मोहब्ब्त का सुरूर पल-पल बढ़ता जाता है…!! वो हर दिन हर पल चाहत की नई इबारतें गढ़ता है वो लड़का न कमाल मोहब्ब्त करता है..!! ©अनु उर्मिल ... »

निर्भया

कभी दिशा, कभी निर्भया,कभी मनीषा ,नन्ही बच्ची कोई, बस नाम अलग-अलग,कहानी सबकी एक, हर घड़ी डर का साया, ना जाने मर्द तुझे किस बात का घमंड है छाया, अबला होने का हर रोज एहसास करवाते हो, मेरी जान की कीमत बस तुने इतनी-सी लगाई, तेरी आँखों के सुकून से आगे बढ़ ना पाई, मेरे शरीर को मांस के टुकड़े से अधिक ना समझा, मेरी रूह में उतर जाने की तुने औकात ही नहीं पाई, ना सीता, ना द्रौपदी चल उठ अब बन झांसी की रानी तु,... »

कवि

ओ कवि, जरा सम्भल कर लिखना यह कविता नही परछाई है तेरी आत्मा का प्रतिरूप यह तेरे अन्दर छिपी भावनाओं की प्रतीक है अच्छे या बुरे उजागर हो जाओगे फिर दुराव- छिपाव ना रख पाओगे एक खुली किताब कहलाओगे उजागर अपनी हर पीड़ा कर जाओगे कलम तुम्हारा दृषिटकोण समझा जाएगी तुम्हारा हर अनुभव जग-जाहिर कर जाएगी फिर रहोगे ना खुद के ,बेपरदा हो जाओगे दर्पण सा ही अनुभव कर पाओगे । »

क्या बेटी होना गुनाह है

क़भी कोख़ में ही मार डाला उसे, कभी काट के फेंक दिया खलिहानों में!! कभी बेंच दिया उसे देह के बाज़ारों में , क़भी सरेराह नोचा सड़कों और चौराहों पे!! जब जी चाहा पूजा देवियों सा, कभी अपमानित किया उसे गालियों से!! आगे बढ़ने की चाहत की तो दीवारों में क़ैद हुई, कभी मान की ख़ातिर उसको झोंक दिया अंगारों में!! दुर्गा,काली की धरती पर कैसी ये विडंबना , इस देश में बेटी होना क्यों है एक गुनाह.. ?? ©अनु उर्मिल ‘अन... »

दो पहलू

सिक्के के दो पहलू समालोचना और आलोचना मन-पल्लवित होता सुन समालोचना वही रचना में आता निखार सुन आलोचना स्वीकारो ह्रदय से दोनों को एक समान यही बने कवि की सही पहचान। »

विचार के जुगनू

कभी कभी मेरे मन के अंधेरे कमरे में न जाने किस झरोखे से चले आते हैं जुगनुओं से झिलमिलाते विचार…!! मैं अपना हाथ बढ़ाकर कोशिश करती हूँ उन्हें छू लेने की और वे छिटककर आगे बढ़ जाने की…!! बड़ी जद्दोजहद के बाद जब अपनी हथेलियों में क़ैद कर लेती हूँ इक चमकता विचार… तब उसे रख देती हूँ किसी कोरे कागज पर ताकि उसकी रोशनी से कुछ पल के लिये ही सही मिट सके मेरे मन का अंधकार..!! © अनु उर्मिल ‘अ... »

समर्पण :- जबरदस्ती या प्यार

समर्पण:- जबरदस्ती या प्यार कोने में दुल्हन बनी मै खड़ी थी, हाथों में सिंदूर की डिबिया पड़ी थी, वक्त था मेरे घर से विदा होने की, छोड़ सब सखियां को जाने की बेला हो चली थी, ये कैसा शोर था जिसमें खुशियों से ज्यादा डर का मोहल था? सब अपने छोड़ कर अनजानों से भरा पड़ा ये घर था, रस्मो के उलझन में ये मेरा मन बड़ा डरा पड़ा था, जब आई बेला समर्पण की तो मन में एक जीझक था, ऐसा नहीं कि मुझे किसी और से प्यार था, ब... »

चुनाव

अरे भाई,चुनाव का वक़्त आया है , क्या करना है? कुछ भी करो, धर्म-धर्म खेलो, जाति-जाति खेलो, औरत संग अनाचार करवा लो, हर दुखती रग पर नमक डालो, बस चुनाव नही हारना है। »

इज़हार

गुस्सा आने पर , इज़हार यूं भी किया जाता है. दरवाज़े को ज़ोर से, बन्द किया जाता है।। *****✍️गीता »

मोबाइल मोह

कुछ दिल,कुछ धड़कन बन गया है,ना देखू एक पल तो मन बेचैन हो जाता है। कैसे एक मशीन जीवन का सार बन गई है,जैसे कोई बालक मां से बंध जाता है।। ये मशीन ही मेरा मोबाइल है,जो मुझको जोड़े रखता है दूर बैठे मेरे परिवार से,मेरे समाज से। कभी अकेलापन इसके साथ महसूस नहीं हो पाता है,और शायद अब मन भी इसके बिना एक पल भी नहीं रह पाता है।। जरूरत खत्म हो गई है घड़ी की शायद,अब समय भी मोबाइल बतलाता है । जरूरत खत्म हो गई है... »

प्रेम की बारिश

सुनो! अपने घर की छत से देर तक जिस आसमान को निहारा करते हो न.. उस आसमान के एक छोटे से टुकड़े में अपने दिल में बसे प्रेम का इक कतरा भर कर इन हवाओं के साथ मेरे पास भेज दो… जब वह प्रेममय बादल मुझपर बरसेगा तो उसकी बारिश में भीग कर फिर से हरी हो जायेगी मुद्दतों से बंजर पड़ी मेरे दिल की ज़मीं..!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ »

अभ्यर्थना है प्रभु

किसी का आसरा नहीं करूँ मन में दंभ न भरूँ अभ्यर्थना है प्रभु बस तेरे पनाह में मैं रहूँ »

असर

फ़िजाए भी कुछ बदलने लगी शायद असर उसपर भी तेरा छाने लगा »

नसीब

हम तो तेरे मुरीद हैं तुमसे मिले तमस ही मेरे नसीब है »

तफ्तीश

आँखे रोके कहाँ रूकती तफ्तीश में लग जाती हैं छिपे हुए अश्क को पहचान लेती हैं »

मायानगरी

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती एक बार फिर साबित यह होता है मत भागो चमकती चीज़ों के पीछे यह सब एक छलावा हैं उस चमक के पीछे भाग कर हम सबने खुद को ही दांव पर लगाया है। »

तस्लीम होगी

कब अपनी इबादत “उन्हे ” तस्लीम होगी सभी सुताओ की ख्वाहिशे महफ़ूज होंगी । »

निर्भया

रात भी खुद के तम से डरी होगी चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी तारों ने ना टूटने की कसम खाई होगी जब बेबसी में उस क्षण की साक्षी होगी। »

अर्द्धनग्न फकीर

अपनी दुर्वलताओ से भी अवगत करवाकर दुनिया को बताया, अहिंसा अपनाकर अर्द्ध नग्न फकीर कहा था कभी किसीने। बिना अस्त्र-शस्त्र के ही, चले लाठी ठेकाकर महिला, किसान सबको मोहा उन्मुक्त मुस्कराकर अविश्वसनीय है, आजादी दिलाया, कृषकाय वृद्ध ने । »

आज झुकाओ अपना माथ

गांधीजी और शास्त्रीजी का जन्मदिन है एक साथ। सम्मान में इनके विनयचंद तू आज झुकाओ अपना माथ।। »

स्मृतियों से

स्मृतियों के झरोखो से ऐसे शूल निकल आए हम फिर से, मिले घावों को अनजाने ही कुरेद आये। »

इंसाफ

हमारे संविधान की विशेषता असंतुष्टो को भी संतुष्ट होने के अवसर उपलब्ध कराती है यही वजह है कि इंसाफ की प्रक्रिया तारीख़ दर तारीख़ चलती जाती है »

नन्ही लगी निशाने पर

हम अभिभावकों के लिए यह कहाँ तक संभव है हर जगह बेटियों के साथ, परछाई बन चल पाना क्या यह उचित होगा, फिर से घर की चाहरदीवारी में, रोक पाना हथरस जैसी घटनाएँ, नितप्रतिदिन डरा रही है हमारी नन्ही सी जान, लगी है निशाने पर ।। »

क्या दे जबाब

बताइए क्या जबाब दें, उस मासूम को कैसे कहें, बाहर का कोई ठिकाना नहीं है कहाँ, क्या, कौन भेङिया का रूप लिए है तेरी जिन्दगी महफ़ूज नहीं, लग सकती है दाव पर। »

क्यूँ है इंकार

पूछ रही नन्ही परी क्या होता यह दुराचार क्यूँ होता महिलाओं के साथ गलत व्यवहार क्यूँ माँ किसी से बात करने पर टोकती तू क्यूँ लगाती पाबंदी, बाहर निकलने क्यूँ है इंकार »

निर्भया

अब के बाद मां-बाप मां-बाप ना रहेंगे ना जिंदा ना मुर्दा रहेंगे तो बस सांस लेती काया। »

खुद की जंग

ना जाने कितनी निर्भया ना जाने, कैसी मर्दानगी बर्बरता की हदें लांघी जुबां तक काटी धरती भी नहीं कांपी कानून को कुछ ना समझे कौन इन्हे इन्सान कहे जानवर भी इनसे हारे भगवान् भी नहीं आए बस ,अब बहुत हुया नारी को ही जगना होगा सितम का सामना करना होगा जंग को खुद ही लड़ना होगा जंग को खुद ही लड़ना होगा। »

खेलें हम अन्तराक्षरी

सावन के इस मंच पर कवियों का है संगम। सुंदर सुहानी संध्या में छोड़ें कुछ सरगम।। दो पद हम लिखते हैं दो पद तुम भी गाओ। खेलें हम अन्तराक्षरी निज कवित्त सुनाओ। »

एक और निर्भया

बस कुछ दिन की बात है सब भूल जाएंगे काम – धन्धों में मशगूल हो जाएंगे नईं कहानी का शोर मचाएंगे फिर कोई और निर्भया होगी जीवन की जंग हार जाएगी कोई कुछ ना करेगा बस इक नाम और जुड़ेगा। »

समय रहते

हाँ कुछ लोगों को समय रहते ही ज्ञान आ जाए अपनी क्षुधा की तृप्ति में, किसी और का चैन न उङाए »

जुदा-जुदा

खुशी हो या गमी संग नहीं रहती सदा एक-दूसरे से मिलकर भी रहती जुदा-ज़ुदा »

अपनेमन में

खुद को संभाल पाते, इस लायक ही कहाँ छोङा है कई अपनों ने ही, अपनेपन में, अपना बन, दिल तोङा है »

दूरियाँ

अधरों पर कभी आया तेरा नाम नहीं नयनों में तेरा प्यार छलक आया हमें चाह नहीं तुझे पाने की दूरियाँ ही मुझे रास आया »

सितारों की दुनिया

सितारों की दुनिया में कैसा नशा छा रहा। दिल ने आदर्श बनाया मन ठगा जा रहा।। जन- जन ने हीरो बनाया था जिसको वही आज कैसे ड्रग के लिए मरे जा रहा।। »

राष्ट्र कवि के जन्मदिन पर

हिन्दी साहित्य के कर्णधार हे हे प्रकाशपुंज नक्षत्र हे दिनकर । हे राष्ट्रकवि आजादी के योद्घा रामधारीसिंह के जन्मदिवस पर।। पद पंकज में दे पुष्पांजलि हम प्रणमति शीश झुकाते हैं। हिन्दी के साहित्य उपासकों हम मुबारकबाद फरमाते हैं।। »

ज़िंदगी मे डाली से गिरता हुआ पत्ता…

ज़िंदगी मे डाली से गिरता हुआ पत्ता भी हमे सिखाता है कि अगर तुम बोझ बन जाओगे तो अपने भी तुम्हे गिरा देंगे. »

तुझसे

मेरी रैना की शुरुआत है तुझसे इन नैनन की बरसात है तुझसे तुम जो दो मीठे बोल भी दो हर दर्द कबूल मुझे, जो मिले हैं तुझसे »

हिमाकत है

प्रेम हमारे लिए इबादत है ईश्वर की दी हुई सबसे खूबसूरत इनायत है प्रेम विश्वास का दूजा नाम है विश्वास नहीं तो बस यह हिमाकत है »

नैतिकता का संचार

सुबह सवेरे , आखोंदेखी घटना का है यह मंजर अरूणोदय से पहले पहुँची,बच्चों की टोली चलकर दौङ लगाते लगते थे, जैसे हो मंजिल पाने को तत्पर स्वाबलम्बी बनने को आतुर, पर मर्यादा का नाम नहीं अगल-बगल में कौन चल रहे, थोड़ा-सा भी ध्यान नहीं अपशब्दो की झङी लगाते, कहाँ तनिक भी वे शर्माते खो गये संस्कार कहाँ ,बची माचनवता आज कहाँ क्या अपनी कथनी’ कुकरनी का उन्हें अंदाज कहाँ एक यही आवाहन है, थोड़ा नौनिहालो पर ध्... »

नियामत

खत्म होगा इन्तजार, स्वागत को कब होंगे तैयार वह सुहाना पल जब कोरोना मुक्त होगा यह संसार इस टूटन-घुटन पङी जिन्दगी से है सभी बेजार बस फिर से हो रब की नियामत सुखमय हो संसार »

इबादत

तस्लीम नहीं उनकी हिमाकत हरहाल में करेंगे अपनी हिफाज़त मुमानियत लगाए अपनी आकांक्षाओं पर नहीं तो भूल बैठेगे हम भी अपनी सराफत मकबूल नहीं तेरी अनैतिक मनाहट मान दोगे तो करेंगे हम तेरी इबादत »

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