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“एक तारा”

जब इस आसमां में
नया तारा जन्म लेता होगा
तो क्या होता होगा?
क्या उसे कोई सैर कराता होगा?
या अकेले ही उन्मुक्त
मड़राता होगा
कोई दिल तोड़ता होगा उसका
या वो खुद ही टूट जाता होगा?
क्या वो भी चांद को मामा पुकारता होगा?
या रह जाता होगा
किसी कोने में जल रही
ढिबरी की तरह गुमसुम सा
और चमक धमक में
खो जाता होगा
अपने आसमां की
और अपनी भागदौड़ भरी
जिंदगी में
एक दूसरे से ज्यादा चमकने
की होड़ में
फिर एक दिन तंग आकर
तोड़ देता होगा
अपने ही तार
और अंधेरे में बैठ कर
बिताता होगा
कुछ पल सुकून के साथ

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