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एक लिफ़ाफा

सुनो! अगली बार जब आओ तो एक लिफ़ाफा लेते आना,
ज्यादा बड़ा नहीं…
बस इतना के एक हस्तिलिखित खत रख पाओ,
चाहो तो थोड़े गुलाब के पंखुड़ियां भी डाल देना।
हल्के हाथों से मोड़ कर एक प्यारी सी मुस्कान के साथ उसे एक डोरी से बांध देना,
पर ख़्याल रखना के आंखों की नमी से कही लिफ़ाफा खराब न होजाए…
मोर के पंख से बनी हुई कलम स्याही में डूबना
और प्यार से अपना नाम लिख देना,
उसपे एक छोटा सा दिल भी बना देना…
मुलाकात बहौत कम होती है इसलिए
अगली बार जब आओ तो एक लिफ़ाफा लेते आना।

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