मानवता व्याधियों से
जूझती रही,
पूरे साल,
ओ दो हजार बीस !!
अब विदा ले।
दो हजार इक्कीस !!
तू खुशियों की
झोली भर के ला
शुभ बन के आ,
मानवता को
जिससे मिले पीड़ा से मुक्ति
ऐसी लेकर आना युक्ति।
मानवता व्याधियों से
जूझती रही,
पूरे साल,
ओ दो हजार बीस !!
अब विदा ले।
दो हजार इक्कीस !!
तू खुशियों की
झोली भर के ला
शुभ बन के आ,
मानवता को
जिससे मिले पीड़ा से मुक्ति
ऐसी लेकर आना युक्ति।