कुछ ऐसा लिखो कि
लोग तुम्हें पढ़ें
पढ़कर मन के भीतर
नयी चेतना के बीज उगें।
कुछ ऐसा लिखो कि
सार्थक हो, शुद्ध हो
तभी कविता कहेगी
कि तुम प्रबुद्ध हो।
पहले साहित्य पढ़ो
तब लिखो,
लिखो तो ऐसा लिखो
कि सच्चे कवि दिखो।
कविता आत्मा की आवाज है
सीख कर नहीं होती,
लेकिन भाषा सीखनी होती है,
भाषा के बिना
कविता नहीं होती।
मन के भीतर की संवेदना
बाहर तभी निकलेगी
जब आपके पास
शब्दों का भण्डार होगा,
अन्यथा सब बेकार होगा।