कांटे को जो बोता है वहीं उसे है कांटता,
फूलों की महक को पाने में कांटे में लिपटा रहता।
मानव जीवन को अपने करके व्यर्थ,
सपनों का राह वह सदैव खोजता है ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कांटे को जो बोता है वहीं उसे है कांटता,
फूलों की महक को पाने में कांटे में लिपटा रहता।
मानव जीवन को अपने करके व्यर्थ,
सपनों का राह वह सदैव खोजता है ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी