जरूरी नहीं है कि वन्दूख लेकर सब देश की सीमा में जाए
देश की ही सेवा है मिली जो जिम्मेदारी है उसे बखूबी निभाए
कोई काम होता नही बड़ा या छोटा मानिए
जूता भी सिले तो रैदास जैसे जगत में अपनी
पहचान बनाए
जरूरी नहीं है कि वन्दूख लेकर सब देश की सीमा में जाए
देश की ही सेवा है मिली जो जिम्मेदारी है उसे बखूबी निभाए
कोई काम होता नही बड़ा या छोटा मानिए
जूता भी सिले तो रैदास जैसे जगत में अपनी
पहचान बनाए