गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं,
इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।।
नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने,
कहना मुश्किल है के और कितनी नज़में बाकी रह गईं।।
राही अंजाना
गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं,
इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।।
नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने,
कहना मुश्किल है के और कितनी नज़में बाकी रह गईं।।
राही अंजाना