ओ मेरे जीवन साथी!
तुझमें कितना है स्नेह भरा,
तू इतना बेचैन हो जाती है
यदि हो मुझको दर्द ज़रा।
मुझको ही क्या घर में कोई
छींके भी तो तू व्यथित हुई
झट से काढ़ा ले आती है
कैसे है इतना स्नेह भरा।
ओ मेरे जीवन साथी!
तुझमें कितना है स्नेह भरा,
तू इतना बेचैन हो जाती है
यदि हो मुझको दर्द ज़रा।
मुझको ही क्या घर में कोई
छींके भी तो तू व्यथित हुई
झट से काढ़ा ले आती है
कैसे है इतना स्नेह भरा।