धीरे-धीरे वो हमसे अनजान हो गए
जो कभी खास थे आज आम हो गए
गुफ्तगू करने से जिनका जी नहीं भरता
आज उनकी खामोशी से हम बदनाम हो गए
धीरे-धीरे वो हमसे अनजान हो गए
जो कभी खास थे आज आम हो गए
गुफ्तगू करने से जिनका जी नहीं भरता
आज उनकी खामोशी से हम बदनाम हो गए