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खिड़की…. बीते कल की

कल मैंने अपनी खिड़की से
अपना बीता हुआ कल देखा…
उस कल में था वो लड़का,
जिसे देखकर मेरी सुबह मुस्कुराती थी,

शाम संवर जाती थी और
रातें ख्वाब बुनने लगती थीं।

पर कुछ यादें सिर्फ
महसूस करने के लिए होती हैं,
दोबारा जीने के लिए नहीं।
इसलिए मैंने खिड़की बंद कर दी…

क्योंकि बीते कल की झलकें सिर्फ
आँखों में नमी छोड़ जाती हैं,
और मुझे आगे बढ़ना था—उस दरवाज़े की ओर,
जहाँ मेरा नया सवेरा मेरा इंतज़ार कर रहा था।

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