खुशबू बिखर रही है
चारों तरफ सुमन के,
वह पवन बड़ी है चंचल
आती उसे हिला के,
भंवरा भी गुनगुनाये
ऐसे समीप जाके,
जैसे बंधे हों उससे
सुन्दर स्नेह धागे।
खुशबू बिखर रही है
चारों तरफ सुमन के,
वह पवन बड़ी है चंचल
आती उसे हिला के,
भंवरा भी गुनगुनाये
ऐसे समीप जाके,
जैसे बंधे हों उससे
सुन्दर स्नेह धागे।