तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा,
तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा,
दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी,
तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।।
राही (अंजाना)
तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा,
तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा,
दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी,
तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।।
राही (अंजाना)