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ख्वाब

ख़्वाबों का क्या है
आ ही जाते हो तुम
बेशक़ रातों को जगा जाते हो तुम

वह प्यार ही क्या जिसमे तड़प ना हो
वह आग ही क्या जिसमे तपन ना हो
अब तोह आग का दरिया है
जल जाना है या पार जाना है

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