वह गुनगुनी धूप सी तेरी हंसी,
मानो गुलाब की पंखुड़ियां एक साथ झड़ी।
मधुर अधर सकुचाये से शरमाये से
बेकरार दिल ये उड़ा जाए रे।
निमिषा
वह गुनगुनी धूप सी तेरी हंसी,
मानो गुलाब की पंखुड़ियां एक साथ झड़ी।
मधुर अधर सकुचाये से शरमाये से
बेकरार दिल ये उड़ा जाए रे।
निमिषा