Site icon Saavan

गुनगुनी धूप

वह गुनगुनी धूप सी तेरी हंसी,
मानो गुलाब की पंखुड़ियां एक साथ झड़ी।
मधुर अधर सकुचाये से शरमाये से
बेकरार दिल ये उड़ा जाए रे।
निमिषा

Exit mobile version