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गुड़िया रानी

उठ मेरी छोटी सी गुड़िया
सुबह हो गई उठ जा अब
बाहर सूरज चमक रहा है
सुबह हो गई उठ जा अब।
अपनी सुन्दर बाल लीलाओं
से महका गुड़िया रानी
अभी बोलना सीख न पाई
करने लग जा शैतानी।
दिन-दिन बढ़ते चले जा रहे
छठा माह आया लगने,
आज हमारी गुड़िया रानी
पलट रही खुद के कहने।

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