( गौरेया )
कूदक – फूदक कर रंग बनाती
दाना को चुग कर खाती हो
कभी घर में कभी आंगन में
तुम मेरे आ जाती हो |
गौरेया रानी तुम हो बडी सयानी
हम सब को मोहित करती हो
भाप मुसीबत को तुम
झटपट फुर्र से उड़ जाती हो |
रंग – रंगीले स्वभाव तुम्हारे
मन को बेचैन सी करती हैं
घर आंगन की श्रृंगार हो तुम
मेरे आशियाने कि पहरेदार |
लालिमा की मुस्कान लिए
चू – चू करती आती हो
चुग – चुग दाने को चाव से खाती हो
गौरेया रानी तुम काम बडे कर जाती हो |
महेश गुप्ता जौनपुरी
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