इंसान में टसन की अग्नि बहुत है,
बढ़ते कदम को रोकने की जहोजहत बहुत हैं।
किसी का घर जले तो तापने वाले बहुत हैं,
सुखी परिवार को देख कर जलने वाले बहुत हैं।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
इंसान में टसन की अग्नि बहुत है,
बढ़ते कदम को रोकने की जहोजहत बहुत हैं।
किसी का घर जले तो तापने वाले बहुत हैं,
सुखी परिवार को देख कर जलने वाले बहुत हैं।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी