जैसे
उम्मीद की प्याली से
चुस्की लेकर
मानों मंज़िल की तरफ
कोई सरिता बह जाती है
वैसे ही
मेरे चंद पलों का चुनिंदापन
मुझे मिलते ही
मेरे मन की विचार–शक्ति
कविता बनकर
कुछ कह जाती है।
– कुमार बन्टी
जैसे
उम्मीद की प्याली से
चुस्की लेकर
मानों मंज़िल की तरफ
कोई सरिता बह जाती है
वैसे ही
मेरे चंद पलों का चुनिंदापन
मुझे मिलते ही
मेरे मन की विचार–शक्ति
कविता बनकर
कुछ कह जाती है।
– कुमार बन्टी