चलो इंसान बनते हैं।
कब तक जकड़े रहेंगे ,
हम भेदभाव की जंजीरों में ।
कब तक पकड़े रहेंगे हम ,
धर्म- भ्रम की बेड़ियों से।
मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं
भगवान तो ना ही सही ,
चलो इंसान बनते हैं।
चलो इंसान बनते हैं।
कब तक जकड़े रहेंगे ,
हम भेदभाव की जंजीरों में ।
कब तक पकड़े रहेंगे हम ,
धर्म- भ्रम की बेड़ियों से।
मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं
भगवान तो ना ही सही ,
चलो इंसान बनते हैं।