मां ये देखो कैसा चांद निकल आया है,
बादलों के गर्भ में चांद देखो समाया है।
अंधेरे रात में आज चांद रोशनी भूल आया है,
चांद के उजाले को बादल ने अपने आगोश में छिपाया है।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मां ये देखो कैसा चांद निकल आया है,
बादलों के गर्भ में चांद देखो समाया है।
अंधेरे रात में आज चांद रोशनी भूल आया है,
चांद के उजाले को बादल ने अपने आगोश में छिपाया है।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी