नींद भी आखिर
बनाई क्या रब ने
पूरा इंसान खो जाता है,
दिन भर संघर्ष करता है
रात को सो जाता है।
कभी-कभी असलियत में
सपने बो जाता है,
हँसते हँसते रो जाता है,
जागता हुआ भी सो जाता है।
नींद भी आखिर
बनाई क्या रब ने
पूरा इंसान खो जाता है,
दिन भर संघर्ष करता है
रात को सो जाता है।
कभी-कभी असलियत में
सपने बो जाता है,
हँसते हँसते रो जाता है,
जागता हुआ भी सो जाता है।