आपकी ख्बाहिसों को
पूरा करना
जानता है दिल,
चले आओ
सजा लें हम
किसी दिन,
स्वप्न की
महफिल ।
जानते हैं सभी,
सपनों को इक दिन,
टूटना पड़ता,
टूटता तन, टूटता मन,
छूट जाती है,
हर मंजिल ।
जानकी प्रसाद विवश
आपकी ख्बाहिसों को
पूरा करना
जानता है दिल,
चले आओ
सजा लें हम
किसी दिन,
स्वप्न की
महफिल ।
जानते हैं सभी,
सपनों को इक दिन,
टूटना पड़ता,
टूटता तन, टूटता मन,
छूट जाती है,
हर मंजिल ।
जानकी प्रसाद विवश