तन मन की मोह माया विष के है सामान,
गुरु के कटू बात लागे है अमृत समान।
गुरु सदैव है वन्दनीय यही मिला है ज्ञान,
गुरु के लिए न्योछावर है यह मेरा जान।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
तन मन की मोह माया विष के है सामान,
गुरु के कटू बात लागे है अमृत समान।
गुरु सदैव है वन्दनीय यही मिला है ज्ञान,
गुरु के लिए न्योछावर है यह मेरा जान।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी