Site icon Saavan

जड़ों को फैलाये मैं हर पल को पकड़ रहा हूँ

जड़ों को फैलाये मैं हर पल को पकड़ रहा हूँ,

देखो किस तरह मैं खुद पर ही अकड़ रहा हूँ,

आया तो था मैं कुछ दूरियाँ मिटाने की खातिर,

मगर आज मैं ही गहरे रिश्तों को जकड़ रहा हूँ।।

– राही (अंजाना)

Exit mobile version