आकाश से पाताल की होगी बातें
पर बातों का कोई भी तर्क ना होगा
जो शब्दों के सागर से ढूंढे ना मोती
तो मुझ में और मुझमे फर्क क्या होगा
आकाश से पाताल की होगी बातें
पर बातों का कोई भी तर्क ना होगा
जो शब्दों के सागर से ढूंढे ना मोती
तो मुझ में और मुझमे फर्क क्या होगा