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तुम मुझे

तुम मुझे
एकांत में में मिले सुख का
पर्याय लगती हो
तुम मुझे मेरी हर समस्या का
उपाय लगती हो
और
लगती हो तुम मुझे
मेरे आँगन की गौरैया
तुम मुझे इस जीवन का
अभिप्राय लगती हो।

तुम दिखती हो उन्मुक्त गगन में
तुम बहती हो पावन पवन में
एक मंशा है मेरे भीतर
आगमन करो न तुम मेरे जीवन में

जो सुख तेरे स्पर्श से
बचकर कहीं रह जाता है
वास्तविकता यह है कि
वो मुझे नहीं भाता हैl

एक राही है जो इस पथ पर
केवल इतने काम को आता है
गली की एक खिड़की खुलती है
और कुछ देख कर चला जाता हैl

मैं पथिक हूँ उस पथ का
जिस पथ पर तेरा पद चिन्ह मिले
मैं हिस्सा हूँ उस योजना का
जिसमें मुझे तेरा दर्शन हो।

तुम मुझे
एकांत में मिले सुख का पर्याय लगती हो
तुम मुझे
मेरी हर समस्या का उपाय लगती हो।

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