जिन्हें पाने की चाहत में, मैं सदा अपनों से लड़ता था
वो देंगे दग़ा हमको कभी हमने ना सोचा था
मिला आघात भी हमको उस मोड़ पे जा के
जहां से लौट के आना बड़ा मुश्किल सा लगता था।।
जिन्हें पाने की चाहत में, मैं सदा अपनों से लड़ता था
वो देंगे दग़ा हमको कभी हमने ना सोचा था
मिला आघात भी हमको उस मोड़ पे जा के
जहां से लौट के आना बड़ा मुश्किल सा लगता था।।