वों पढ़ लेते हैं
आंखों ही आंखों में
मेरे दिल का हाल
ना बता चाहूं उनको
मुझ पर क्या बीता इस साल
क्यों ना उनसे कुछ दूरी बढ़ा ली जाए
ना पढ़ सके वों मेरे मन को
क्यों ना उन से आंखें चुरा ली जाए.
वों पढ़ लेते हैं
आंखों ही आंखों में
मेरे दिल का हाल
ना बता चाहूं उनको
मुझ पर क्या बीता इस साल
क्यों ना उनसे कुछ दूरी बढ़ा ली जाए
ना पढ़ सके वों मेरे मन को
क्यों ना उन से आंखें चुरा ली जाए.