यूँ ना उड़ाओ मेरी नींद
मैं रिपोर्ट लिखा दूंगी,
दिल की अदालत में।
ज़माना कुछ भी कहे
अपना बनाकर
सजा दिला दूंगी,
दिल की अदालत में।
यूँ ना उड़ाओ मेरी नींद
मैं रिपोर्ट लिखा दूंगी,
दिल की अदालत में।
ज़माना कुछ भी कहे
अपना बनाकर
सजा दिला दूंगी,
दिल की अदालत में।