समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब।
मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक।
हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता,
पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक।
देवेश साखरे ‘देव’
रफ़ीक-साथी
समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब।
मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक।
हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता,
पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक।
देवेश साखरे ‘देव’
रफ़ीक-साथी