या दहेज की मांग रखो
या मेरी चाह रखो,
दोनों में से एक चुनो
धर्मपत्नी या सामान चुनो।
सामान दहेज का कब तक
खाओगे या भोगोगे,
मैं तो जीवन भर साथ रहूँगी
मरते दम तक साथ रहूँगी।
दहेज चार दिन की शोभा
फिर केवल धोखा ही धोखा।
या दहेज की मांग रखो
या मेरी चाह रखो,
दोनों में से एक चुनो
धर्मपत्नी या सामान चुनो।
सामान दहेज का कब तक
खाओगे या भोगोगे,
मैं तो जीवन भर साथ रहूँगी
मरते दम तक साथ रहूँगी।
दहेज चार दिन की शोभा
फिर केवल धोखा ही धोखा।