नैन हमारे व्याकुल है देखन खातिर सखी,
ना तुम मिली ना नयन को सुख मिले।
मन बाबरा होकर ढुंढ रहा तुमको सखी,
आस हमारे टूट रहें आंखों के बनकर आंसू सखी।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नैन हमारे व्याकुल है देखन खातिर सखी,
ना तुम मिली ना नयन को सुख मिले।
मन बाबरा होकर ढुंढ रहा तुमको सखी,
आस हमारे टूट रहें आंखों के बनकर आंसू सखी।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी