किसी के पीछे नहीं घर से अकेला निकल आया हूँ मैं,
लोग कहने लगे के डर के अकेला निकल आया हूँ मैं,
वो कैसे देखेंगें दिन और रात के उजाले में मुझको यूँ,
ख़्वाब जिनके अपनी आँखों में भरके निकल आया हूँ मैं,
राही अंजाना
किसी के पीछे नहीं घर से अकेला निकल आया हूँ मैं,
लोग कहने लगे के डर के अकेला निकल आया हूँ मैं,
वो कैसे देखेंगें दिन और रात के उजाले में मुझको यूँ,
ख़्वाब जिनके अपनी आँखों में भरके निकल आया हूँ मैं,
राही अंजाना