Site icon Saavan

निवेदन

क्यों चलाते हो तेज गाड़ियाँ,
ऐसी तो कोई मजबूरी नहीं ।
मंजिल तक पहुँचना जरूरी है,
जल्दी पहुँचना तो जरूरी नहीं ।।

चंद मिनट बचे भी तो क्या,
जब जिंदगी होगी पूरी नहीं ।
फासले तो तय हो ही जायेंगे,
लंबी इतनी कोई दूरी नहीं ।।

कुचलते आगे जाने की होड़ में,
क्यों थोड़ी भी सबूरी नहीं ।
गलती अपनी, सजा निर्दोष पाते,
होश में चलो, सुरूरी नहीं ।।

राह तकती बच्चों की निगाहें,
बीवी की मांग पसंद सिंदूरी नहीं ।
परिवार हमसे पूरा है ‘देव’,
असमय इसे करो अधूरी नहीं ।।

देवेश साखरे ‘देव’

Exit mobile version