ना जाने कब नींद से जागी आँखें?
रात भर रोकर सूजी हैं कितनी आँखें।
बिता तो लेंगे हम ज़िन्दगी तेरे बगैर भी
पर तुझे देखकर ज़िंदा हैं ये मेरी आँखें।
ना जाने कब नींद से जागी आँखें?
रात भर रोकर सूजी हैं कितनी आँखें।
बिता तो लेंगे हम ज़िन्दगी तेरे बगैर भी
पर तुझे देखकर ज़िंदा हैं ये मेरी आँखें।