( पगली लड़की /04 )
मेरी जान तुम यू ही रूठा ना करो मुझसे
बादल बनकर मुझ पर यू बरसा ना करो
तुम्हारी लबो की हँसी मे बसी जिन्दगी
तुम यू ही मुझे तडपाया ना करो ।
तेरी साँसो मे बसी है मेरी सांसे
मेरी जान मुझे यू ही छोडा ना करो अकेले
तेरी धडकन ही हैं मेरी जिन्दगी
मेरी जिंदगी को खेल समझ खेला ना करो ।
तू समन्दर कि धारा मै रेत का किनारा
मेरे सासो को यू ही फिसलने ना देना
लबो पर न्योछावर है मेरी मोहब्बत
बस मेरी वादो को यू ही तोडा ना करो ।
रब से माँगी थी मैंने दुआए तुम्हारे लिए
खुश रहो खुश रखो घर आंगन को मेरे
सपना बस इतना सा सजाया था मैंने
मेरे घर को तुम स्वर्ग बनाये रखना ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
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