कविता- पहला प्यार
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ना शीतल मे चांद अजोरी, ना खुशबू मे बेला है|
प्यास लगी पानी की
जहर मिल गया |
मांगा जिसे दुआ में,
वही मुझपे कहर होगा गया|
दिल दुख रहा है,
होठ रो रहा है|
आखों मे आंसूए भी,
आखों मे चुभ रहा है|
मिल जाय मुझे चाहत नहीं,
खो जाय मुझे चाहत नहीं|
आकर मेरे दिल को समझा दे,
मत रो मै तेरे किस्मत मे नही|
देने का मैंने वादा कर लिया,
इस जनम मे साथ निभाऊंगा|
मेरी तकदीर हो मेरा पहला प्यार हो,
गर्लफ्रेंड नही पत्नी तुम्हे बनाऊंगा|
एक बात सुनना बाकि है,
एक बात पुछना बाकि है|
पुरुष प्रगति मे स्त्री का हाथ है,
वह हाथ मेरे हाथ मे रख दो,
अब जग को दिखाना बाकि है| ना शीतल……
हर संसार छोड़ दूगां,
मजहब कि हर दिवार तोड़ दूगां|
तेरी खुशियो के खातिर,
खुद को निल्लाम कर दूगां|
प्यारा सा परिवार होगा,
सुन्दर सा घर द्वार होगा|
बस इजाजत मिल जाय अगर तुम्हारी,
हर जन्मो मे हमारा साथ होगा|
दो वक्त की रोटी होगी,
शानों शौकत तुम्हारी होगी।
मै राजा नहीं!
रानी बनाके रखूंगा,
मिले अगर साथ तुम्हारा,
पलको के छाओं मे छिपा के रखूंगा|
तेरे हर नखड़े को उठाउगा,
हर बार तुझसे हार जाउगा|
मत करो प्यार को स्वीकार,
मै इनकार कभी न कर पाउगा|
मेरे किस्मत मे एक मोड़ है,
मेरे आखों मे तेरा ही प्यार है|
मिलने दो आखो से आखों को,
तेरे आखों मे मेरा संसार है| ना शीतल…….
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कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
थाना- तह. कोरांव
जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306