खाने पीने ऐंसो आराम को समझे सभी सुखी संसार,
गहरी निद्रा मोह माया को समझे है उपहार।
दुःख की गठरी बांध कबीरा चिंतन करके सोवे,
झूठे विचार को सच्चा समझे प्रभु भक्ति खोवे।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खाने पीने ऐंसो आराम को समझे सभी सुखी संसार,
गहरी निद्रा मोह माया को समझे है उपहार।
दुःख की गठरी बांध कबीरा चिंतन करके सोवे,
झूठे विचार को सच्चा समझे प्रभु भक्ति खोवे।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी