गमे-जुदाई किसी से बाँटी नहीं जाती।
बगैर तेरे ये रातें अब काटी नहीं जाती।
मिटा दो फ़ासले, जो हमारे दरम्यान है,
गहरी कितनी खाई, जो पाटी नहीं जाती।
देवेश साखरे ‘देव’
गमे-जुदाई किसी से बाँटी नहीं जाती।
बगैर तेरे ये रातें अब काटी नहीं जाती।
मिटा दो फ़ासले, जो हमारे दरम्यान है,
गहरी कितनी खाई, जो पाटी नहीं जाती।
देवेश साखरे ‘देव’