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बारिश की बूंदो की

बारिश की बूंदो की
हल्की हल्की आवाज़
कानो में रस घोलते
जेहन में उतर जाती है
कौंधती बिजलियाँ कुछ
ठक ठक सी दस्तक
देती है मन के कोने में
जिस कोने को बंद दरवाज़ा
बना के रखा है वक़्त ने
दरवाज़ा कभी खुलता तो
कभी फस जाता है चौखट में
हवाएँ भी बारिश में कुछ
अल्हड हो जाती है
चलती है जैसे
बारिश उन्हें जवाँ कर गई
इन ठंडी हवाओं से
लिपट कर सब बंद दरवाज़े
खुल जाते है
प्रकृति की इस छटा
से लिपटने को
राजेश’अरमान’

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