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बारिश: मन की रिमझिम और ख़्वाबों का गांव

बारिश की बूंदों की खुशबू, बहती हर बूंद में छुपी कहानी। जब मौसम बन जाता है रिमझिम, मन की धड़कनें बदल जाती हैं जवानी।

बारिश की ताल पे झूमती है ज़िंदगी, जीने की ख्वाहिशें जगमगाती हैं आसमानी। पानी की बूंदें लहराती हैं नदियों में, प्रकृति के गीत बजाती हैं जल तरंगी।

छाती में बसी है बारिश की चाह, चुपके से आती है खिलखिलाहट। प्यार की मिठास बरसाती है फुहारों में, दिल को भर देती है ये मुस्कानी।

मिट्टी की खुशबू घुलती है हवाओं में, प्रकृति के रंग ढलते हैं आसमानों में। प्यार और अपनापन की बहार छाती है इस बारिश में, मन को भीगोने की चाहत होती है मन की मानी।

बारिश की रिमझिम सुनकर दिल खो जाता है, हर बूंद में खो जाती है ज़िंदगी की कहानी। इस बारिश की फुहारों में बसता है ख़्वाबों का गांव, ज़िंदगी की खुशियों से भर जाती हैं मनमानी।

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