कविता- बुद्ध भक्त भीमराव
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बुद्ध भक्त भीमराव,
आपको फिर से आना होगा,
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
भारत को बौद्धमय बनाना होगा,
अशोक चंद्रगुप्त के सपनों को,
भारत के घर-घर पहुंचाना होगा,
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,
सबको बुद्ध का उपदेश सुनाना होगा,
सब का दुख सुख हो जाए,
अष्टांगिक मार्ग पर चलना बताना होगा,
जाति धर्म पाखंड छोड़ू,
नफरत इर्ष्या द्वेष को छोड़ू,
अनुचित खर्चा नशा को छोड़ू,
छोड़ू भगवान भरोसे रहना ,
हाथ पकड़कर मंदिर की जगह ,
शिक्षा मंदिर में ले चलना होगा,
तेरे अनुयाई लाखों हैं,
कोई चर्च में जाता,
कोई मंदिर में जाता,
जाता कोई दुनिया के आडंबर में,
कहे ऋषि सब कुछ करना,
बुद्ध भीम के शरण में रहना,
जीवन उत्तम से उत्तम हो जाएगा,
जब कोई तुम्हें सताएगा,
भगवान से पहले –
तुम्हें बचाने संविधान खड़ा हो जाएगा,
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कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-