बुलंदियों से पुछ लिया कौन हो तुम,
शेर के भेष में कोई और हो तुम।
मुझे भी जान लो ये मित्र कौन हूं मैं,
अपने लिबाज़ को उठा देखो मेरे मित्र हो तुम।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
बुलंदियों से पुछ लिया कौन हो तुम,
शेर के भेष में कोई और हो तुम।
मुझे भी जान लो ये मित्र कौन हूं मैं,
अपने लिबाज़ को उठा देखो मेरे मित्र हो तुम।।
महेश गुप्ता जौनपुरी