सड़के फैली, नदियां सिमटी
क्या अच्छा संदेश गया
घट गई सर्दी ,बढ़ गई गर्मी
और भंवर में देश गया
अपने कर्तव्यों से हटकर अपना हित ही सोंचा है
चंद पैसों के खातिर भविष्य देश का बेचा है
सड़के फैली, नदियां सिमटी
क्या अच्छा संदेश गया
घट गई सर्दी ,बढ़ गई गर्मी
और भंवर में देश गया
अपने कर्तव्यों से हटकर अपना हित ही सोंचा है
चंद पैसों के खातिर भविष्य देश का बेचा है