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बेचारी नींद

बात ऐसी हो गई कि
नींद नहीं आएगी ; हमें आज।
वो लोयल नहीं, ढोंगी थे,
उजागर हुई , मगर ये बात।

आंखों से वो बड़े भोले लगते,
शर्म हया का ,क्या नाटक करते !
भ्रम मिटा, चलो  ये आज,
नींद बेचारी कैसे आए ?
धोखा मिला है हमें जनाब  !
                          –मोहन सिंह मानुष

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