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बेचैनियां

बेचैनियां ,मदहोशियां आती रही,जाती रही ।
आवारगी सी इस दिल पर
छाती रही, गुनगुनाती रही,
हम नशे के पैमाने में….. डूबते- उभरते रहे,
यादें….. इस कदर दिल को कभी जख्म कभी मलहम लगाती रही।
निमिषा सिंघल

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