जाग उठा था आशा आजादी के परवानों का,
वीर बहादुर भगत सिंह जब अंग्रेजों को ललकारा था।
कतरे कतरे खून के बूंद का यही नारा था,
हिन्द की धरती हिन्दुस्तान भाईयों को बहुत प्यारा था ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जाग उठा था आशा आजादी के परवानों का,
वीर बहादुर भगत सिंह जब अंग्रेजों को ललकारा था।
कतरे कतरे खून के बूंद का यही नारा था,
हिन्द की धरती हिन्दुस्तान भाईयों को बहुत प्यारा था ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी